कैसी पभू तूने

कैसी पभू तूने कायनात बांधी-2
एक दिन के पीछे एक रात बांधी
साथ - साथ बांधी 2

कैसी पभू तूने.....

कभी थकते नहीं है वो घोड़े
तूने सूरज के रथ में जो जोड़े-2
चाँद दूल्हा बना, व्याहने रजनी चला
साथ चंदमा के तारों की बारात बांधी
साथ साथ बांधी....


कैसी प्रभू तूने.................

कैसी खूबी से बांधा ये मौसम
सर्दी, गर्मी, बसंत और ग्रीषम
साथ बादलों के बीच बरसात बांधी
साथ - साथ बांधी

कैसी प्रभू तूने.................

पशू - पक्षी वो जलचर छुपाए
तूने सब के है जोड़े बनाए,,
राग और रागनी , नाग और नागनी
साथ स्त्री के पुरुषों की जात बांधी
साथ- साथ बांधी

कैसी प्रभू तूने.................

आराधना राय "अरु"


तर्ज़-- आधा है चंद्रमा बात आधी..... 












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