गीत------ मैं सब हारी रे



 चित्र साभार गुगल
मैं  सब हारी रे
जीवन में अपनाया तेरा नाम रे
मुझे भाया नहीं कोई काम रे
मैं  सब हारी रे
तन से उज़ली मन कि मैली
 लोभ मोह कि तृष्णा  झेली
 मैं तिहारी रे
 सब कुछ ही समाया तेरे धाम में
 मैं तो भूल गई सारे काम रे
मैं  सब हारी रे
आती- जाती साँस भी तेरी 
पाती - लिखू मैं नाम कि तेरी
 भई मतवाली रे
तूने है पिलाया ऐसा जाम रे
जग आया नहीं मेरे काम रे

आराधना राय "अरु"




Comments

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 14 - 03 - 2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2312 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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    1. आभार आपका दिलबाग जी धन्यवाद

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  2. Replies
    1. धन्यवाद रश्मि जी

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