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साईं

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 साभार गुगल    भोर का प्रकाश बन झिलमिलाना मेरे साईं     घर में ज्ञान का दीप तुम जलाना मेरे साईं     साथी बन रास्तों पर कहीं मिलना मेरे साईं     दुःख में मन में आस्था बन चलाना मेरे साईं       सुख मिले जगत में या दुःख मिले हमे साईं     लब पर तेरा  नाम  सुबह शाम हो बस साईं    हो अँधेरा मन का रोशनी बन मुस्कुराना साईं    प्रीत बन भक्ति कि मेरी सदा संग रहना साईं  आराधना राय "अरु"       

साईं रखना ध्यान

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  मन कि मेरी आत्मा करती है अरदास   दुःख में सदा साईया सदा तुम ध्यान  आराधना राय "अरु"

साईं भजन

गीत बन कर तू मुस्कुराया है साईं नाम का दिया जलाया है नाम  लब पर सुबह शाम आया है  आरती सा अपना मन बनाया है साईं  मनके से मन फिरा नहीं दुनियाँदारी में मन को लगाया है  मेरे  विलाप तूम भी सुन सको तो जमाने की हर ठोकर को खाया है तुम्हारे बिन मिटते नहीं मन के अँधेरे उजालों में आज हमने घर बनाया है चाँद तारो का जहान लगता है अपना "अरु " ने साईं को अपने बुलाया है आराधना राय अरु

भक्ति गीत

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चित्र साभार गुगल         1   वन - वन घुमे राधा प्यारी          किन नयनं कि आस में          जहाँ पिया  से मिलेगे.........       2  साँचा मनवा भटकत काहे           पाए नहीं क्यों चैन रे           दिया बन के चलेगे..........    3   बाती बिना नहीं जलता दीपक         ज्योति बुझे ना आस कि         जियरा फूल खिलेगे .................  4    कान्हा - कान्ह टेर लगाई        मधुबन के बाल - ग्वाल ने         सगरे  मिल के चलेगे............. 5     तुम बसते मन मंदिर न्यारे        श्रद्धा भर विश्वास में "अरु"        कान्हा- राधा संग मिलेगे          आराधना राय "अरु"

राम नवमी पर विशेष

राम नवमी पर    विशेष लक्ष्मण से बोले रघुवर भईया हमें बताना रे अपयश ना तू लगाना रे पूछेगी माता तेरी लक्षमण कहाँ बताओ दूँगा जवाब क्या मैं उठ के मुझे बताओ दुर्लभ है जग में तूम सा भाई सहोदर पाना रे आरधना राय  "अरु" समर्पित स्वर्गीय परम पूज्यनाना जी को   पूर्व उप - निदेशक शिक्षा बोर्ड उत्तर प्रदेश पंडित त्रिवेणी राय शर्मा 

माँ कि भेंट

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द्वार तिहारा खुला रहे माँ सज़ा रहे दरबार रे सब बिगड़ी बनाने वाली पूरी करती आस रे भोली भाली सूरत माँ कि करुणामय मुस्कान रे द्वार तिहारा खुला रहे माँ सज़ा रहे दरबार रे माँ सा कोई कहाँ जगत में निश्छल माँ का प्यार रे दुनियाँ है तेरे श्रीचरणों में साँचा तेरा नाम रे द्वार तिहारा खुला रहे माँ सज़ा रहे दरबार रे मन कि सब की जानने वाली करूँ मैं तेरा ध्यान रे ज्योति जले दिन- रैन दीये कि अम्बा तेरे प्यार में द्वार तिहारा खुला रहे माँ सज़ा रहे दरबार रे तारों की बारात सजी है जगमग जैसे थाल रे धार जहाँ गंगा कि बहती ऊँचे- ऊँचे पहाड़ रे द्वार तिहारा खुला रहे माँ सज़ा रहे दरबार रे निर्मल मन कि तू ही धनी है लक्ष्मी तेरा नाम रे ज्वालामुखी बन पाप हरे माँ दुख भंजनी तेरा नाम  रे द्वार तिहारा खुला रहे माँ सज़ा रहे दरबार रे लाख दुःख चाहे घिरे रहे माँ लेती रहूँ तेरा नाम रे लाज़ माँ तू "अरु" कि रखना तेरे दर से है आस रे द्वार तिहारा खुला रहे माँ सज़ा रहे दरबार रे आराधना राय "अरु"

सावरे

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चित्र साभार गुगल नटनागर सावरे नैना हो गए बावरे मीठी मुरलिया कि तान सुना ओ नटनागर............ जाऊं कभी यमुना तो पीछे- पीछे आए रे देख के अकेली मेरी मटकी गिराए रे कैसा ये छलिया ने जादू डाला ओ नटनागर............ किसी दिन बांसुरी मैं तेरी चुराऊँगी चूम - चूम होठों से सीने से लगाऊँगी कैसा ये मुरली ने जादू डाला ओ नटनागर............ आराधना राय "अरु"