कैसी पभू तूने कायनात बांधी-2 एक दिन के पीछे एक रात बांधी साथ - साथ बांधी 2 कैसी पभू तूने..... कभी थकते नहीं है वो घोड़े तूने सूरज के रथ में जो जोड़े-2 चाँद दूल्हा बना, व्याहने रजनी चला साथ चंदमा के तारों की बारात बांधी साथ साथ बांधी.... कैसी प्रभू तूने................. कैसी खूबी से बांधा ये मौसम सर्दी, गर्मी, बसंत और ग्रीषम साथ बादलों के बीच बरसात बांधी साथ - साथ बांधी कैसी प्रभू तूने................. पशू - पक्षी वो जलचर छुपाए तूने सब के है जोड़े बनाए,, राग और रागनी , नाग और नागनी साथ स्त्री के पुरुषों की जात बांधी साथ- साथ बांधी कैसी प्रभू तूने................. आराधना राय "अरु" तर्ज़-- आधा है चंद्रमा बात आधी.....
चित्र साभार गुगल मैं सब हारी रे जीवन में अपनाया तेरा नाम रे मुझे भाया नहीं कोई काम रे मैं सब हारी रे तन से उज़ली मन कि मैली लोभ मोह कि तृष्णा झेली मैं तिहारी रे सब कुछ ही समाया तेरे धाम में मैं तो भूल गई सारे काम रे मैं सब हारी रे आती- जाती साँस भी तेरी पाती - लिखू मैं नाम कि तेरी भई मतवाली रे तूने है पिलाया ऐसा जाम रे जग आया नहीं मेरे काम रे आराधना राय "अरु"
Sundar sundar bhaav
ReplyDeletedhnywad shivrajji
DeleteSundar sundar bhaav
ReplyDeletemaujhe bhi sunder laga jab aapne kaha dhanywad shiv raj ji
Deleteसुंदर पंक्तियों आराधना जी।
ReplyDeleteधन्यवाद हिमकर जी
Delete